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Monday, December 10, 2012

इच्छा शक्ति का परिचय- Hindi Inspirational Story

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उनका  नाम  है  Jadav Payeng (जादव पायेंग), Assam  के  एक  छोटे  से  गाँव  Jorhat में  रहने  वाले  इस  माहन  इंसान  ने  वो  कर  दिखाया  है  जो  बड़ी -बड़ी  environmental conferences और  seminars में  part लेने  वाले  scientists और  environmentalist शायद सोच भी नहीं सकते.
जी  हाँ , जादव  जी  ने  अपने  अदम्य  साहस ,त्याग  और  इच्छा  शक्ति  का  परिचय  देते  हुए  तीस  साल  की  कड़ी  मेहनत  के  बल  पर sandbar( रेती)  के ढेर  को   जंगल  बना  दिया  है .  इनके  बारे  में  मुझे  कल  के  Times of India से  पता  चला , और  इस  news को  पढ़ते  ही  मेरा  सर  इनके  सम्मान  में  झुक  गया , मैं  ऐसे  निस्वार्थ  भाव  से  प्रकृति  की  सेवा  करने  वाले  कर्मठ  पुरुष  को  शत-शत नमन करता  हूँ .
आइये  जानते  हैं  उनकी  कहानी :
 जब  Jadav Payeng 16 साल  के  थे (Year 1979) उसी  समय  एक  तूफ़ान  से  Brahmaputra नदी  के  बीच  बना  एक  550 hectare Sandbar तबाह  हो  गया , उसपे  एक  भी  पेड़  -पौधे  नहीं  बचे  और  जीव  जंतु  भी  मर  गए . Jadav जी  जब  वहां  पहुंचे  तो  उन्होंने   मरे  हुए  साँपों   को  देखा  , जो  कड़कती  धुप  में  छाँव  ना  मिलने  के  कारण  मर  गए  थे . उसके बाद उन्होंने   Forest Department से  मिलकर  वहां  plantation की  बात  की , पर  as expected उन्हें  कोई  ख़ास  मदद  नहीं  मिली , और  ये  कहा  गया  की  वहां  पेड़ -पौधे  उगाना  संभव  नहीं  है , हो  सके  तो  बांस  लगा  कर  देखो . तब  किशोर जादव  ने  खुद  ही  निश्चय  किया  कि  अब  वो  ये  काम  अकेले  करेंगे  और , अपना  घर  बार  छोड़  कर  उस  sandbar पर  रहने  लगे, वहां  पेड़  पौधे  लगाते  रहे , और  दिन  रात  उनकी  देख -भाल  करते  रहे .

ये  काम  उन्होंने  लगातार  तीस  साल  तक  किया , और  उस  sandbar को  एक  जंगल  में  बदल  दिया . आज  इस  जंगल  में  बहुत  सारे  विलुप्त  प्राय  जीव  -जंतु  , हिरन , पक्षी , गैंडे , और  3-4  बाघ  भी  रहते  हैं .  इस  जंगल  का  पता  हाल  ही  में  , 2008 में  सरकारी  अधिकारियों  को  तब  लगा  जब  वो  लगभग   100 हाथियों  के  झुण्ड , जिसने  एक  गाँव को  तबाह  कर  दिया  था ; को  खोजते  हुए  वहां  पहुंचे .  इस  वीराने  sandbar में  इतने  बड़े  जंगल  को  देख कर  वो  स्तब्ध  रह  गए , और  तभी  पहली  बार  वे  Jadav Payeng से  मिले .
बहुत  से  लोगों  ने  वहां  रह  रहे  जानवरों  को  मारने   और  जंगल  को  उजाड़ने   की   कोशिश  की  लेकिन  Jadav ने   उन्हें  पहले खुद को  मारने  के  लिए  कहा . जानवरों  और  पेड़ -पौधों  को  अपने  बच्चों  की  तरह  मानने  वाले  जादव  जी  की  dedication देखकर सरकारी अफसर  भी  उनकी  मदद  के  लिए  आगे  आ  गए . और  पिछले  साल  200 hectare क्षेत्र  में  सरकार  द्वारा  plantation कराया  गया . स्थानीय  MP ने  भी  इस  जंगल  को  Wildlife (Protection) Act, 1972 के  अंतर्गत   conservation reserve का  दर्जा  दिलाने  की बात की है , उम्मीद  है  ऐसा  हो  पायेगा  और  जादव पायेंग  का  बसाया  जंगल  सदा  के   लिए  हरा -भरा  बना  रहेगा .
दोस्तों , ये  भारत  का  दुर्भाग्य  ही  है  कि  Dashrath Manjhi और  Jadav Payeng जैसे   महान  लोगों  की  अनदेखी  की  जाती  है , अगर  यही  काम  कोई  अमेरिका  या  इंग्लैंड  में  करता  तो  उसे  hero का  दर्जा  दिया  जाता  और  सरकार  की  तरफ  से  financial help भी  दी  जाती . खैर  इंसान  सम्मान  दे  ना  दे  भगवान  तो  ऐसे  ही लोगों  को  अपना  प्रेम  और  आशीर्वाद  देता  है.
 Jadav Payeng के  जीवन  से  हम  क्या  सीख  सकते  हैं  :
  •  कोई  भी  व्यक्ति , चाहे  उसने  जितनी  भी  सिख्स  हांसिल  की  हो , चाहे  वो  जिस  background का  हो , अपने  दृढ  इच्छा – शक्ति  से  असंभव  को  संभव  बना  सकता  है .
  • किसी  बड़े  काम  को  करने  के  लिए  लगातार  प्रयत्न  करना  होता  है , यदि  हम  कुछ  बड़ा  करना  चाहते  हैं  तो  हमें  भी  Never Give Up  spirit के  साथ  अपने  काम  में  लगे  रहना  चाहिए . तीस  साल  का  समय  बहुत  लम्बा  समय  होता  है .
  •  जिसे  कुछ  महान  करना  होता  है  वो  दूसरों  की  मदद  का इंतज़ार नहीं करता , वो  तो  अपने  दम  पर  सब  कुछ  कर  गुजरता  है . पायेंग  जी  ने  सरकारी  मदद  ना  मिलने  के  बावजूद  हिम्मत  नहीं  हारी , और  वो  कर  दिखाया  जो  ज्यादातर लोगों  के  लिए  सोचना  भी  मुश्किल  है .

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