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Tuesday, October 9, 2012

उद्देश को पाना हैं [Inspirational Shayari]

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पतझड़ के बाद जैसे उड़ते हैं पत्ते, लगती है ऐसी वीरान ज़िंदगी…
तुम जो नहीं हो साथ मेरे, शायद तभी तो है कुछ कमी…

“उद्देश्य” क्या है जीवन का मेरे, जानने निकला हूँ मैं यही…
मुझे विश्वास है इक दिन, पूरा होगा सफ़र ये मेरा…

प्यार की तलाश नहीं है, क्यूँकि ये तो है रब की दुआ…
बिन माँगे मिलती है ये, फिर ढूँढने से क्या होगा…

तलाश नहीं उस दौलत की, जो होती है कई लोगों के पास…
कर देती है दिल उनका पत्थर, फिर क्यूँ जगाऊँ मैं ऐसी प्यास?

नहीं चाहता नाम कमाना, और छा जाना दुनिया पर…
तूफ़ान से पहले घिरने वाली, घनघोर काली घटा की तरह…

जीवनपथ पर सीख सकूँ कुछ, चाह यही है दिल में मेरे…
कर पाऊँ औरों का भला भी, धन्य कर सकूँ मानव होना…

पीड़ाओं को समझ सकूँ, हे इश्वर शक्ति दे दो इतनी…
संवेदना न मरे कभी भी, और दे पाऊँ जो पा न सका…

पाने खोने के चक्कर में, भूल गया था मैं उद्देश्य…
तभी तो लगती थी मुझको, फीकी, बेरंग, वीरान ज़िंदगी…
 करता चलूँगा काम अब मैं, चाह न करूँगा फल की…

शायद हो जीवन वृक्ष मेरा, फल से लदा और सफल तभी…
और देखूँ जब पीछे मुड़कर, कारवाँ हो साथ मेरे…
ताकि मैं रहूँ न रहूँ, पर हाथ हों जो करें पूर्ण “उद्देश्य”…

स्त्रोत-http://p4poetry.com/

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