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Thursday, August 26, 2010

सच्चा धर्म (Hindi Motivational Stories)

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सच्चा धर्म
एक बार इब्राहिम एक काफिले के साथ तीर्थयात्रा पर जा रही थे | काफिले में दर्जनों यात्री थे | बीच रास्ते में काफिले से एक अनजान व्यक्ति बीमार पड़ गया | इब्राहीम उसे जानते नही थे परन्तु उसे बीमार देख कर तत्काल उसकी सेवा में जुट गए | इब्राहीम के पास तीर्थयात्रा के लिए जीतनी रकम थी वह उस व्यक्ति के इलाज में खर्च हो गयी फिर वो व्यक्ति ठीक नही हुआ | उसकी हालत ख़राब होती गयी और वो एक दिन बेहोश हो गया | उसकी ये हालत देखकर इब्राहीम घबरा गए उन के पास एक पैसा भी नही था पर वो उसे लावारिश छोड़कर नही जाना चाहते थे |
उन्हें जब कुछ नही सुझा तो उन्होंने उसका खच्चर बेच दिया और उस पैसे से उसकी दवाई और खाने की व्यस्था की | एक - दो दिन में उसे होश आया तो इब्राहीम ने उस से कहा भाई मुझे माफ़ करना तुमारी बेहोशी के हालत में मैंने तुम्हारा खच्चर बेच दिया और उस पैसे से तुम्हारी दवाई और खाने की व्यवस्था की | वह यात्री रोने लगा और बोला मै बहुत कमजोर हो गया हूँ |खच्चर के बिना मै आगे कैसे जाउगा मुझ से तो अब एक कदम भी नही चला जाता है | इब्राहीम बोले तुम चिंता मत करो मै हूँ ना | जब तक मै तुम्हे मजिल तक नही पंहुचा देता तब तक तुम्हारे साथ रहूगा |
वह व्यक्ति बोला तुम करोगे क्या तुम्हारे पास तो खच्चर भी नही है | इब्राहीम बोले तुम चिंता मत करो | उस दिन से इब्राहीम उसे अपने कंधे पर बैठा कर ले जाने लगे | एक दिन काफिले के एक आदमी ने पुछा 'इब्राहीम यह तुम्हारा कौन लगता है जो तुम इसकी इतनी सेवा कर रहे हो |'
इब्राहीम ने कहा "यह मेरा कोई नही है, यह भी आप के तरह काफिले का एक सहयात्री है | उसे बीमारी की हालत में छोड़ कर मै नही जा सकता, उसकी सेवा करना मेरा कर्त्तव्य ही नही मेरा धर्म भी है अशक्त की सेवा करने से बड़ी तीर्थयात्रा और कोई नही है |" यह सुनकर वह आदमी भी इब्राहीम के साथ उस बीमार यात्री की सेवा में जुट गया |

निषकर्ष :-- दीन - दुखियो की सेवा करना ही सच्ची तीर्थयात्रा है |

मेरा सच्चा धर्म आपके साथ अपना ज्ञान बाटना हैं , चाहे आप इससे hindi motivational stories ke रूप में ले लीजिये या किसी motivational videos की तरह , मकसद यही की आपकी कामयाबी में मेरा भी कुछ हिस्सा रहे 

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